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Chapter 40 - अध्याय 40: शून्य का राक्षस और रईसजादे का पतन

नीलामी घर के बाहर का माहौल बारूद जैसा गर्म था। 'यंग मास्टर' ड्रैको अपनी 50 'पवित्र-रक्त' (Sacred-Blood) गार्ड्स की सेना के साथ खड़ा था। उसके चेहरे पर एक क्रूर मुस्कान थी, जैसे उसने शिकार को पिंजरे में घेर लिया हो।

​सड़क पर भीड़ जमा हो गई थी। हर कोई तमाशा देखना चाहता था, लेकिन कोई भी ड्रैको के रास्ते में आने की हिम्मत नहीं कर सकता था।

​"तूने मेरी एल्फ खरीदी," ड्रैको ने अपनी तलवार की नोक विक्रम की ओर की। "और तूने मुझे सबके सामने शर्मिंदा किया। आज मैं तेरी खाल उधेड़ कर शहर के गेट पर टांगूंगा, ताकि सबको पता चले कि 'ब्लैक-मून' कबीले से उलझने का अंजाम क्या होता है।"

​विक्रम ने शांति से अपनी कलाई पर बंधी पट्टी को कसा। उसने एलारा की ओर देखा। "तैयार हो?"

​एलारा ने एक गहरी सांस ली। उसकी आँखों में जंगल की हरी चमक लौट आई थी। "ये शहर पत्थर का है, मास्टर। लेकिन यहाँ की लकड़ी... मेरी बात सुनती है।"

​"गार्ड्स! मारो इन्हें!" ड्रैको चिल्लाया। "और उस लड़की को जिंदा पकड़ना!"

​हमला!

​पचास गार्ड्स एक साथ झपटे। उनकी तलवारों और भालों पर 'आग' और 'बर्फ' की चमक थी।

​लेकिन इससे पहले कि वे विक्रम तक पहुँचते, एलारा ने ज़मीन पर हाथ मारा।

​"नेचर्स रैथ: वुडन स्पाइक्स (Nature's Wrath: Wooden Spikes)!"

​सड़क के किनारे बनी दुकानों और नीलामी घर के लकड़ी के खंभे अचानक जीवित हो गए। वे टूटकर नुकीले भालों में बदल गए और हवा में उड़ते हुए गार्ड्स की ओर लपके।

​खचाक! खचाक!

​आगे की पंक्ति के दस गार्ड्स हवा में ही बिंध गए।

​"क्या?!" ड्रैको की आँखें फटी रह गईं। "लकड़ी का जादू? शहर के अंदर?"

​एलारा थकी हुई थी, लेकिन वह हार मानने वालों में से नहीं थी। "मैं जंगल की रक्षक हूँ। जहाँ लकड़ी है, वहां मैं रानी हूँ।"

​लेकिन दुश्मन संख्या में ज्यादा थे।

​"तीरंदाजों! उस लड़की पर निशाना लगाओ!" गार्ड्स के कप्तान ने आदेश दिया।

​बीस तीर हवा को चीरते हुए एलारा की ओर आए। एलारा के पास बचने की जगह नहीं थी।

​तभी, एक काली परछाई उसके सामने आ गई।

​विक्रम।

​उसने कोई हथियार नहीं निकाला। उसने बस अपना बायां हाथ आगे किया।

​[वॉयड बैरियर: सक्रिय]

​तीर विक्रम से टकराए नहीं, बल्कि उसके हाथ के सामने बनी एक काली, गोल ढाल में समा गए। जैसे पानी स्पंज में समा जाता है।

​विक्रम ने अपनी मुट्ठी भींची।

​"वापस लो," विक्रम ने कहा।

​शूम्!

​वही बीस तीर दुगनी रफ़्तार और काली आग के साथ वापस उन्हीं तीरंदाजों की ओर उड़ गए।

​चीखें गूंज उठीं। आधी सेना एक ही पल में साफ हो गई थी।

​भीड़ में सन्नाटा छा गया। यह कोई साधारण 'नवागंतुक' नहीं था।

​ड्रैको का पसीना छूट गया। "तू... तू कौन है? कोई इंसान इतनी आसानी से 'पवित्र-रक्त' हमला नहीं रोक सकता!"

​विक्रम धीरे-धीरे आगे बढ़ा। उसके जूतों की आवाज़ ड्रैको के दिल की धड़कन जैसी लग रही थी।

​"मैं वो हूँ," विक्रम की आवाज़ भारी और ठंडी थी, "जिसने देवताओं को भी अपने घुटनों पर देखा है। तुम तो बस एक बिगड़े हुए बच्चे हो।"

​ड्रैको डर गया, लेकिन उसका अहंकार अभी भी बाकी था। उसने अपनी जेब से एक लाल रंग का क्रिस्टल निकाला।

​"मेरे पास अभी भी मेरा तुरुप का इक्का है!" ड्रैको चिल्लाया। "फायर टोटेम (Fire Totem): समन द फ्लेम बीस्ट!"

​क्रिस्टल टूट गया और उसमें से भयानक आग का एक बवंडर निकला। उस आग ने एक 15 फीट ऊंचे 'ज्वालामुखी भालू' (Volcano Bear) का रूप ले लिया। इसकी गर्मी इतनी तेज थी कि सड़क के पत्थर पिघलने लगे।

​"इसे जला दो!" ड्रैको हंसा। "यह भालू 'म्यूटेंट' स्तर का है! यह तुझे राख बना देगा!"

​भालू ने विक्रम पर आग की नदी उगली।

​विक्रम के पास बचने का समय नहीं था। आग ने उसे पूरी तरह घेर लिया।

​"मास्टर!" एलारा चीखी।

​ड्रैको पागलों की तरह हंसने लगा। "खत्म! देखा? कोई मुझसे नहीं जीत सकता!"

​लेकिन आग के बीच से कोई चीख नहीं आई।

​इसके बजाय... एक अजीब सी आवाज़ आई।

​क्रैक... क्रैक... (अंडे के टूटने की आवाज़)

​और फिर... स्लर्र्र्र्प! (चूसने की आवाज़)

​आग धीरे-धीरे कम होने लगी। नहीं, वह बुझ नहीं रही थी। उसे कोई खा रहा था।

​विक्रम के स्पेस-रिंग से वह काला अंडा बाहर निकल आया था और हवा में तैर रहा था। भालू की सारी आग एक भंवर की तरह उस अंडे के अंदर जा रही थी।

​अंडा लाल हो गया, और फिर...

​कड़क!

​अंडा फूट गया।

​धुएं के बीच से एक छोटा सा जीव बाहर निकला।

​यह कोई डरावना ड्रैगन या राक्षस नहीं था।

​यह एक छोटा सा, काला, गोल-मटोल फ़रबॉल (Furball) था। इसकी दो बड़ी-बड़ी मासूम बैंगनी आँखें थीं और एक छोटी सी पूंछ थी। यह किसी बिल्ली के बच्चे जैसा दिख रहा था।

​भीड़ और ड्रैको हैरान रह गए।

​"एक... बिल्ली?" ड्रैको ने अविश्वास से कहा। "तेरा हथियार एक काली बिल्ली है?"

​वह छोटा जीव (फ़रबॉल) विक्रम के कंधे पर जा बैठा और उसने अपनी ज़बान से अपना चेहरा साफ किया।

​"म्याऊ?" (Mew?)

​विक्रम भी हैरान था। "मैंने सोचा था कोई ड्रैगन निकलेगा।"

​तभी, उस ज्वालामुखी भालू ने दहाड़ मारी। उसे लगा कि उसका मजाक उड़ाया जा रहा है। उसने अपना विशाल पंजा उस छोटी सी "बिल्ली" पर मारा।

​विक्रम ने बचाव करने की कोशिश की, लेकिन उस छोटे जीव ने विक्रम को रोका।

​छोटा जीव हवा में उड़ा और भालू के सामने आ गया।

​ड्रैको हंसा। "यह तो गया!"

​अचानक, उस छोटे से, प्यारे से जीव ने अपना मुंह खोला।

​और उसका मुंह... खुलता ही गया।

​उसका मुंह उसके शरीर से 50 गुना बड़ा हो गया। उसके मुंह के अंदर दांत नहीं, बल्कि एक ब्लैक होल था।

​"गुआआआर्क!" (Guark!)

​उस छोटे जीव ने एक ही झटके में उस 15 फीट के विशालकाय 'ज्वालामुखी भालू' को निगल लिया।

​सन्नाटा। पूर्ण सन्नाटा।

​भालू गायब था। छोटा जीव वापस अपने सामान्य, प्यारे आकार में आ गया। उसने एक डकार ली।

​बर्प!

​उसने अपने पेट (जो अब थोड़ा फूल गया था) को थपथपाया और खुशी से विक्रम के कंधे पर वापस आ गया।

​[सिस्टम अलर्ट: पालतू जानवर का जन्म सफल!]

[प्रजाति: वॉयड-ग्लटन बीस्ट (Void-Glutton Beast) - प्राचीन प्रजाति]

[क्षमता: यह अपने से 100 गुना बड़े दुश्मन को खा सकता है और उसकी ऊर्जा को मालिक को दे सकता है।]

[नामकरण बाकी है...]

​विक्रम ने उस जीव को देखा, फिर ड्रैको को।

​"तुम्हें भूख लगी है?" विक्रम ने अपने नए पेट से पूछा।

​छोटा जीव ड्रैको की ओर देखकर अपनी जीभ लपलपाने लगा।

​ड्रैको की आत्मा कांप गई। उसकी सेना खत्म हो चुकी थी। उसका सबसे ताकतवर भालू नाश्ता बन गया था। और अब वह "बिल्ली" उसे खाने के लिए देख रही थी।

​"न... नहीं!" ड्रैको पीछे हटा और गिर गया। "मुझसे गलती हो गई! मुझे मत मारो! मेरे पिता शहर के लॉर्ड हैं! वह तुम्हें मुंहमांगी कीमत देंगे!"

​विक्रम धीरे-धीरे ड्रैको के पास गया और उसके सामने उकड़ूं बैठ गया।

​"तुम्हारे पिता?" विक्रम ने ड्रैको के गाल को थपथपाया (अपमानजनक तरीके से)। "उन्हें आने दो। मुझे उनसे कुछ सवाल पूछने हैं। लेकिन उससे पहले..."

​विक्रम ने ड्रैको के हाथ से उसकी 'स्पेस-रिंग' और सारे कीमती गहने उतार लिए।

​"यह मेरी मानसिक क्षति (Mental Damage) का हर्जाना है," विक्रम ने कहा।

​तभी, शहर के केंद्र से एक सायरन बजा। हवा में एक भारी दबाव (Pressure) महसूस हुआ। आसमान में एक उड़ता हुआ रथ आ रहा था।

​"कौन मेरे बेटे को छूने की हिम्मत कर रहा है?!" एक गूंजती हुई आवाज़ आई।

​सिटी लॉर्ड आ गया था।

​एलारा ने विक्रम का हाथ पकड़ा। "मास्टर, वो बहुत ताकतवर है। उसका स्तर 'इवॉल्व्ड' (Evolved) है। हमें भागना चाहिए!"

​विक्रम ने ऊपर देखा। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि एक योजना थी।

​"भागेंगे नहीं, एलारा," विक्रम ने मुस्कुराते हुए अपने छोटे पेट (Pet) को सहलाया। "अब तो असली सौदा शुरू होगा।"

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