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Chapter 3 - Chapter 3 - MERI ADHURI KAHANI (BY NANDU) PART-3

(उसी समय मेरे एक दोस्त ने कहा था कि ये तुम्हारी जिंदगी fuck करके जाएगी)

मुझे कुछ नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है , लेकिन मैं उस दिन बहुत खुश था कि मैने उसको अपने दिल की बात बता दी है ,

अब मुझे इस बात का डर था कि आगे उसका जवाब क्या होगा ,,,,,

एक मेरा दोस्त ने कहा कि तुम अब उसको फोन मत लगाना यदि वो फोन लगाएगी तो समझ जाना कि रिजल्ट पॉजिटिव है और यदि फोन ना लगाएगी तो समझ जाना कि रिजल्ट नेगेटिव है । बस मै उसके फोन का वेट करने लगा और उसका फोन नहीं आया ।

दो दिन बाद मै कोचिंग जा रहा था तब उसका फोन आया मेरे अंदर इतनी खुशी की अब मै क्या ही बताऊं मुझे लगा कि अब सब सही हो गया (पर काश ऐसा होता)

मैने उससे ऐसे ही नॉर्मल तरीके से बात की और वो ज्यादा कुछ नहीं बोली और मैं भी नहीं बोला मै कोचिंग गया वो मुझे वही दिखी लेकिन कुछ बोली नहीं मै भी कुछ नहीं बोला । अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं ऐसे ही मै कोचिंग में बैठा था इतने में एक दोस्त कोचिंग का ही मेरे पास आके बोला कि चलो कही घूमने चलते है मेरा भी मूड सही नहीं था मै भी बोला चलो ठीक है चलते है ,अब मै और मेरे दोस्त ने एक रेंटल स्कूटी ली और घूमने चल दिए ड्राइव मै ही कर रहा था , हम लोग लगभग शाम को 2 घंटे घूमे , मै गाड़ी चला रहा हु लेकिन मैं कहीं और ही खोया था मै अपने ही खयालों में खोया था पता नहीं क्या सोच रहा था कि (her वो मेरे पीछे बैठी है और मैं गाड़ी चला रहा हु) बस ऐसे ही अपने खयालों में खोया था कि मैने ध्यान ही नहीं दिया कि गाड़ी कितनी स्पीड में चल रही है और अचानक से मेरे सामने (इंदौर zoo) के पास एक गड्ढा आ गया और मैने ध्यान नहीं दिया और सीधे ही सीधे उस गड्ढे में गाड़ी चला दिया गाड़ी डिसबैलेंस हुई और हम लोगों का एक खतरनाक वाला एक्सीडेंट हो गया उस टाइम मुझे लग रहा कि कोई चांस ही नहीं है कि मैं जिंदा बच जाऊंगा ,,,,,,,

कुछ देर बाद सब लोग इक्ट्ठा हो गए और हमे संभालने लगे मेरा जो दोस्त था जो मेरे पीछे बैठा था उसके पैर में चोट लगी और ज्यादा उसे नहीं लगी, मुझे ज्यादा ही चोट लग गई थी मेरे पूरे चेहरे पर चोट लगी थी और हाथ में, पैर में सिर में ब्लड निकल रहा लेकिन मैं कुछ और ही सोच रहा हु। फिर मै अपने खास दोस्तों को फोन लगाया और पूरी बात बताई और बोला कि जल्दी आ जाओ वो लोग आए और हमे वहा से ले गए हमारा इलाज कराए अब मुझे इतना दर्द हो रहा कि अब मै क्या ही बताऊं और ये बात मै अपने घर में नहीं बताई ।

उसके चार से पांच दिन बाद मेरा कॉलेज का एग्जाम था , कैसे भी करके धीरे धीरे घाव सूखने लगे।

हमारा अगले दिन कॉलेज का एग्जाम था ,,,,

शाम को उसने मैसेज किया कि कल एग्जाम के बाद मिलते है मैने बोला ठीक है कोई बात नहीं मिल लेंगे , इतनी बात में मुझे ऐसा लगा कि जीवन की सबसे बड़ी खुशी मिल गई हो मै अगले दिन facemask लगा के मै एग्जाम देने चला गया मै उस दिन बहुत खुश था इतना कि तीन घंटे के एग्जाम में मै एक घंटे में ही बाहर आ गया अब बाहर आने के बाद मै उसका वेट कर रहा हु कि अब वो कब निकले कुछ देर बाद वेट करने के बाद वह बाहर निकली मै उसके साथ वही पुरानी जगह अपने कॉलेज के (ICH) में गया बात करने के लिए हम दोनों वहां बैठ गए और हमारी बात होने लगी।

उसके बात करते करते मुझे पता लगने लगा कि रिजल्ट नेगेटिव है उसने यही बात करने लगी कि दोस्त बनके रहते है , उसने कहा कि मैं तुम्हे एक दोस्त के नजरिए से देखती हु , मै तुमसे प्यार नहीं करती उसने कहा कि तुम्हारे लिए मेरे मन में कोई feelings नहीं है ये सब बातें उसने कहा और मैं चुप चाप सुन रहा था , मै बोलता ही क्या मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मेरा कलेजा अचानक से फट गया हो, जब किसी इंसान से तुम कुछ और की expextion रखते हो और वो उस इंसान से नहीं मिलती तो बहुत दुख होता है ऐसा लगता है कि अब जिंदगी जीने का कोई फायदा नहीं ,

मैने उसको बोला कोई बात नहीं फिर मै उसको ibus स्टॉप तक छोड़ा और वो वहां से चली गई ।

मै चुप चाप रूम आ गया और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं मैं लेटा था रात को लेकिन मुझे नीद ही नहीं आ रही थी, फिर मेरे वो रात के आंसू और उसकी यादों ने मुझे इतना ग़म दे दिया कि अब मै नशा ना करता तो शायद आज मैं जिंदा ना होता, मै नशा करने में एकदम से मजबूर हो गया था और मैं नशा के अलावा करता हु क्या,,,,,

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