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Chapter 3 - Meri Zindagi Part 9

टपरी वाले का सच

हम सब उस चाय की टपरी को देखकर पूरी तरह डर गए थे।

अभी कुछ देर पहले वहाँ कुछ भी नहीं था,

लेकिन अब वही टपरी फिर से हमारे सामने खड़ी थी।

और उस टपरी के अंदर वही आदमी खड़ा था।

वह हमें देख रहा था।

उसका चेहरा अभी भी कोहरे की वजह से साफ दिखाई नहीं दे रहा था।

फिर उसने धीरे से कहा —

"डरो मत… आ जाओ… चाय तैयार है…"

हम सब एक-दूसरे की तरफ देखने लगे।

किसी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि आगे जाए।

तभी मेरे दोस्त सूरज ने धीरे से कहा,

"मुझे लगता है हमें यहाँ से चले जाना चाहिए…"

लेकिन तभी…

वह आदमी टपरी से बाहर आया।

अब वह हमारे थोड़ा पास आ चुका था।

जैसे ही वह थोड़ा और पास आया,

हमें उसका चेहरा थोड़ा साफ दिखाई देने लगा।

उसका चेहरा बहुत अजीब लग रहा था।

उसकी आँखें गहरी और थकी हुई लग रही थीं,

और उसका चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे वह बहुत सालों से सोया नहीं हो।

उसने धीरे से कहा —

"तुम लोग उस दिन भी आए थे…

और आज फिर आ गए…"

यह सुनकर हम सब हैरान रह गए।

क्योंकि इसका मतलब था कि

उसे उस दिन की सारी बात याद थी।

मैंने डरते हुए पूछा,

"आप… कौन हैं?"

कुछ पल तक वह आदमी चुप रहा।

फिर उसने धीरे से कहा —

"बहुत साल पहले…

यहाँ मेरी ही चाय की दुकान थी…"

हम सब ध्यान से उसकी बात सुनने लगे।

उसने आगे कहा —

"एक रात… कुछ अजीब हुआ…

और उसके बाद से मैं…

इस जगह से कभी जा ही नहीं पाया…"

यह सुनकर हम सबके दिल की धड़कन तेज़ हो गई।

क्योंकि इसका मतलब था…

वह आदमी शायद अभी भी इसी जगह से जुड़ा हुआ था… 👻

और तभी अचानक…

कोहरा फिर से घना होने लगा।

और धीरे-धीरे…

वह आदमी हमारी आँखों के सामने गायब होने लगा।

हम सब डर के मारे वहीं खड़े रह गए।

क्योंकि अब हमें समझ आ रहा था कि

उस जगह पर कुछ ऐसा था…

जो आज तक खत्म नहीं हुआ था।please comment me

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