रहस्य का अंत… या शुरुआत?
जब मैंने अपने घर के पास वही चाय की टपरी देखी,
तो मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि
यह सच है या फिर मेरा वह डरावना सपना।
टपरी के अंदर वही आदमी खड़ा था।
वह मुझे देख रहा था…
और उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।
मेरे पैर जैसे जम गए थे।
कुछ सेकंड बाद उसने धीरे से कहा —
"तुम सच जानना चाहते थे…
इसलिए मैं तुम्हारे पास आया हूँ।"
मेरे शरीर में डर की सिहरन दौड़ गई।
मैंने डरते हुए पूछा,
"आप… आखिर चाहते क्या हैं?"
वह आदमी कुछ पल चुप रहा…
फिर उसने कहा —
"मैं यहाँ फँसा हुआ हूँ…
कई सालों से…"
उसने बताया कि कई साल पहले
एक रात कुछ लोग उसकी चाय की टपरी पर आए थे।
उन लोगों ने उससे झगड़ा किया…
और उसी रात उसके साथ बहुत बुरा हुआ।
उसके बाद से उसकी आत्मा
उसी जगह पर भटकती रह गई।
उसने धीरे से कहा —
"जो भी उस रास्ते से गुजरता है…
वह मुझे देख सकता है।"
मैंने डरते हुए पूछा,
"तो आप हमसे क्या चाहते हैं?"
उस आदमी ने मेरी तरफ देखा और कहा —
"बस… मेरी कहानी लोगों तक पहुँचा दो…"
"ताकि लोग जान सकें कि
उस रात मेरे साथ क्या हुआ था…"
इतना कहकर वह आदमी धीरे-धीरे
कोहरे में गायब होने लगा।
और कुछ ही पल में
वह पूरी तरह गायब हो गया।
उस दिन के बाद
मैंने उस आदमी को फिर कभी नहीं देखा।
लेकिन आज भी…
जब सुबह के समय घना कोहरा होता है…
तो मुझे कभी-कभी दूर से
कपों की टकराने की हल्की आवाज़ सुनाई देती है…
और तब मुझे याद आता है —
उस रहस्यमय चाय वाले की कहानी… 👻please comment karna na bhule
