*Chapter 5: घर ka mahol bdla*
स्कूल से घुमावदार गलियों से होते हुए, दोस्तों से मिलते-जुलते, गिरते-पड़ते मैं घर पहुंचा…
मम्मी कुर्सी पर बैठी थी… मानो मेरा ही इंतजार कर रही हो
मुझे देखते ही बोली—
"हो गया पेपर? कैसा गया?"
मैंने धीरे से कहा—
"अच्छा था…"
मम्मी तुरंत बोली—
"नकल मार ली न?"
मैं घबरा गया—
"नहीं मम्मी…!"
मम्मी बोली—
"झूठ मत बोल… अभी-अभी तेरा दोस्त आया था, सब बता गया!"
अब मेरी हालत खराब…
मैंने तुरंत बहाना बनाया—
"मम्मी मेरी मजबूरी थी… पढ़ाई की थी, पर जो पढ़ा था वो आया ही नहीं…"
मम्मी ने थोड़ी डांट लगाई… और चली गई…
लेकिन असली मसला तो अब शुरू होना था…
मेरी छोटी बहन बोली—
"भाई, तूने नकल की? टीचर ने पकड़ा नहीं?"
मैंने हंसते हुए कहा—
"तेरे भाई को पकड़ ले ऐसा कोई पैदा ही नहीं हुआ!"
फिर बहन ने पूरी कहानी पूछी…
और मैंने भी मजाक-मजाक में सब सच बता दिया…
मुझे क्या पता था… यही मजाक आगे भारी पड़ने वाला है…
Next part (sister wala twist start):
अगले दिन मेरी बहन का एग्जाम था…
वो स्कूल गई… और इस बार उसने सब कुछ ध्यान से देखा…
सीट, कॉपी, आस-पास के बच्चे… सब कुछ…
और फिर… वो भी उसी रास्ते पर चल पड़ी…
लेकिन इस बार… जो हुआ…
वो किसी ने सोचा भी नहीं था…
सबकुछ मेरी कल्पना से बाहर था....
Aakhir me Jo huva....
vo to soch ke muje bhi dr lgne lga
us din mne bhi ak ksm Kha Li Thi...
Ksm ye nhi Khai Thi Ki Aaj K bad nkl nhi kruga...
ksm to kuchh or hi Khai Thi???
