रात के दो बज रहे थे। हवेली के बाहर सन्नाटा इतना गहरा था कि सूखी पत्तियों के गिरने की आवाज़ भी किसी के चीखने जैसी लग रही थी। आर्यन की सांसें तेज़ चल रही थीं। उसके हाथ में मौजूद टॉर्च की रोशनी धुंधली पड़ने लगी थी, जैसे वह भी उस कमरे की नकारात्मक ऊर्जा से डर रही हो।
1. कमरे का वो कोना
आर्यन ने कमरे के बीचों-बीच खड़े होकर चारों तरफ नज़र दौड़ाई। दीवारें सीलन भरी थीं और उनसे एक अजीब सी गंध आ रही थी—पुरानी सड़ी हुई लकड़ी और लोहे जैसी। अचानक उसे महसूस हुआ कि उसके पीछे कोई खड़ा है। एक ठंडी लहर उसकी गर्दन से होकर गुजरी। जब वह पलटा, तो वहाँ कोई नहीं था, सिवाय एक पुराने आदमकद आईने के।
आईने की सतह धुंधली थी, लेकिन उसमें आर्यन का अक्स उसे खुद जैसा नहीं लग रहा था। आईने के भीतर का 'आर्यन' हिल नहीं रहा था, जबकि असली आर्यन कांप रहा था। आईने वाले आर्यन के चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान उभरने लगी, और उसकी आँखें धीरे-धीरे पूरी तरह काली होने लगीं।
2. पुरानी डायरी के पन्ने
मेज पर रखी वो फटी हुई डायरी अपने आप पलटने लगी। हवा का कोई झोंका नहीं था, फिर भी पन्ने इतनी तेज़ी से पलट रहे थे जैसे कोई अदृश्य हाथ किसी खास जानकारी की तलाश में हो। पन्ने एक जगह जाकर रुके। उस पर खून जैसी स्याही से लिखा था:
"वे यहाँ अकेले नहीं मरे थे। हमने उन्हें दफनाया था, लेकिन उनकी आत्माएं आज भी इस हवेली की नींव में सांस लेती हैं। अगर तुमने उन्हें देख लिया, तो तुम भी उन्हीं का हिस्सा बन जाओगे।"
अचानक, फर्श के नीचे से खुरचने की आवाज़ आने लगी। कचर-कचर... जैसे कोई नाखूनों से लकड़ी को फाड़ने की कोशिश कर रहा हो।
3. अंधेरे का घेरा
आर्यन कमरे से बाहर भागने के लिए मुड़ा, लेकिन दरवाज़ा गायब था। जहाँ दरवाज़ा होना चाहिए था, वहाँ अब सिर्फ एक ठोस ईंटों की दीवार थी। वह फंस चुका था। तभी टॉर्च की रोशनी पूरी तरह बुझ गई।
अंधेरे में उसे महसूस हुआ कि कमरे की दीवारें संकरी हो रही हैं। वे पास आ रही थीं। फुसफुसाहटें अब साफ़ सुनाई दे रही थीं। हज़ारों आवाजें एक साथ उसका नाम पुकार रही थीं—कुछ रो रही थीं, कुछ हंस रही थीं।
"आर्यन... हमारे साथ आओ... यहाँ बहुत ठंड है..."
उसने अपने पैरों पर किसी का ठंडा स्पर्श महसूस किया। नीचे देखा तो अंधेरे में भी सफेद, पीली पड़ चुकी उंगलियां उसके टखनों को जकड़ रही थीं। वे उंगलियां फर्श के नीचे से निकल रही थीं।
